संकट और नवजागरण
आज देश हमारा चौतरफा संकट से घिर गया उदारीकरण के करण सिर उनका फिर गया
वैश्वीकरण के नाम पर कितना कहर ढाया है
आर्थिक संकट बेरोजगारी ने उधम मचाया है
छंटनी महंगाई लूट खसोट आज बढती जा रही
भ्रूण हत्या और दहेज़ की अंधी चढ़ती आ रही
कठिनाईयों का बोझ ये महिलाओं पर आया है
युवा लड़कियों की दुनिया पे काला बादल छाया है
गहरे तनाव में लड़कियां ये जीवन बिता रही हैं
फिर भी हिम्मत करके करतब खूब दिखा रही हैं
सारे रिश्ते कलंकित हुए आज के इस संसार में
सगे सम्बन्धी परिचित फंसे घिनोने बलात्कार में
शिक्षक का रिश्ता भी तो हरयाणा में दागदार हुआ
अभिभावकों का दिलो दिमाग आज तार तार हुआ
सामाजिक मूल्यों में आज गिरावट आई है भारी
चारों तरफ अपसंस्कृति की छाई देखो महामारी
फेश बुक पर चैटिंग से नहीं समाज बचने वाला
उदारीकरण और ज्यादा भोंडे खेल रचने वाला
वंचित तबके और महिला युवा लड़के लड़कियां
मिलके खोलेंगे जरूर समाज की बंद खिड़कियाँ
इंसानी रिश्ते बनेंगे रंग भेद जात भूल जायेंगे
नवजागरण का सन्देश घर घर तक पहुंचाएंगे
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