Wednesday, 28 March 2012

अन्दर का २५ प्रतिशत यदि बाहर के साथ मेल खाता है तो बड़ी बात है इस समाज व्यवस्था में 
अमीर भी दुखी गरीब अलग तरह से दुखी तो क्या दुःख ही इस समाज की धुरी है ?
 क्या ऐसा समाज सोचा जा सकता है जहाँ सुख जीवन की धुरी हो  
कुदरत और मानव का संघर्ष ही जीवन है 
मानव द्वारा मानव का शोषण खत्म किया जा सकता है -- 

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