Friday, 12 December 2014

हाथ एक औजार भी है और प्यार भी और खूंखार भी

हाथ एक औजार भी है और प्यार भी और खूंखार भी
 एक बार की एक घटना आज कल की  घटी घटनाओं के बाद बार मेरे दिमाग में आ रही है ।
pgims में सर्जरी विभाग में घटित एक घटना इस बातचीत का आधार है । एक यूनिट का ओ पी डी  चल रहा है । एक महिला लगभग 27 --28 साल की उम्र की दिखाने  के लिए आती है । एक डाक्टर परीक्षण रूम में ले जाकर उसका निरिक्षण करता है । एक फीमेल अटैंडेंट भी वहाँ मौजूद है । कुछ देर में वह महिला बाहर जाती है और हड़बड़ी सी में एक नौजवान पुरुष के साथ परीक्षण कक्ष में घुस  कर वे दोनों डाक्टर  को भला बुरा कहने लगते हैं  । शोर सुनकर यूनिट हैड भी परीक्षण कक्ष में जाता है तो देखता है कि  वह नौजवान डाक्टर को थप्पड़ मार रहा है  । हैड ने बीच बचाव किया और पूछा -- क्या बात हुई ? बताओ तो सही । महिला ने बताया कि आपके डाक्टर ने मेरे से  छेड़खानी की  है । हैड ने बाकि सब को बाहर भेज कर एक महिला अटेंडेंट और उस महिला को वहां रखा और महिला को विश्वास में लेकर हकीकत जानने की कोशिश की । महिला ने बताया कि  मेरी बायीं छाती में एक गाँठ है और दर्द है । डाक्टर ने देखते हुए मुझसे छेड़खानी की है, दाई छाती को देखते हुए छेड़ छाड़ की है  । हैड ने कहा कि छाती की बीमारी  के लिए दोनों छातियों का निरिक्षण जरूरी होता है । महिला बोली -- निरिक्षण की बात तो समझ आती है मगर छेड़छाड़ क्यों की यह बात समझ नहीं आती । हैड कहने लगा की क्या प्रूफ है तुम्हारे पास ? जाहिर है क्या प्रूफ दे ? सहायक अटेंडेंट ने भी कहा कि मैंने तो ऐसा कुछ नहीं देखा । वह महिला फिर भी कहती रही कि उसके साथ डाक्टर ने छेड़छाड़ की है । इतनी देर में उसका पति भी अंदर आ गया और बात को उलझती देख कर हैड ने बात को सुलझाने की गरज से अपनी तरफ से डाक्टर के लिए हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगी । मगर पति पत्नी अड़े  थे कि डाक्टर माफी मांगे बाहर सबके सामने । यह बात हैड के भी गले नहीं उतरी । उसने कहा कि फिर तो मामला पुलिश को दे देते हैं दूध का दूध और पानी का पानी अपने आप साफ़ हो जायेगा | पति पत्नी थोड़े से भयभीत हुए और अंदर ही डाक्टर के द्वारा माफी मांगने पर चले गए । पूरे ओ पी डी  में तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गयी । पता नहीं कोई कहाँ से पता निकाल लाया उस महिला के बारे कि उसका दो बार पहले  भी झगड़ा हो  चुका है और पैसे लेकर ब्लैक मेल करती है ।
अब सवाल ये है क़ि ये कैसे पता लगाया जाये कि छेड़छाड़ हुई या नहीं ? कैसे प्रूव किया  जाये ?
 हैड काफी   परेशान कि  कहीं पति पत्नी पुलिश में चले गए तो क्या होगा ? रात भर जागता रहा हैड कि यंग डाक्टर के साथ ज्यादती न हो जाये । कैरियर खराब न हो जाये । फिर उसे एक पिंजरे फिल्म की कहानी ने उसकी समस्या का समाधान किया ।
नौटंकी है हिरोइन उस  फिल्म में और  श्री  राम लागू फिल्म का हीरो है और गाँव का चौधरी है । हिरोइन नौटंकी दिखाने उस गाँव में जाती है तो हीरो अनाप सनाप बातें उसके चरितर के बारे में करता है और नौटंकी नहीं होने देता । हिरोइन आहिस्ता आहिस्ता हीरो को अपने  प्रेम से अपनी और आकर्षित कर  लेती है और  हीरो गाँव गाँव उसकी नौटंकी देखने जाने लगता है । एक दिन जब नौटंकी का कार्यक्रम चल रहा होता है तो एक मनचला स्टेज पर आकर उस नौटंकी हीरोइन का हाथ पकड़ लेता है । नौटंकी अपना हाथ छुड़वा लेती है मगर हीरो को लगता कि नौटंकी ने भी इस को चेरिश किया । बाद में खूब वाद विवाद होता है  कि  हिरोइन  ने उसको  थपड़  क्यूँ नहीं मारा या विरोध क्यूँ  नहीं किया और आखिर नौटंकी सवाल करती है कि जब उस आदमी ने  मेरा हाथ पकड़ा तो बताओ क्या मेरा चेहरा भाव शून्य नहीं था ।  यदि उस वक्त मेरे हाथ में भाव नहीं थे तो मेरा हाथ एक लकड़ी का टुकड़ा था । यह बात तुम पुरुष शायद कभी न समझ पाओगे ।
उस नौटंकी फिल्म के इस प्रसंग से हैड ने निष्कर्ष निकाला कि एक डाक्टर का हाथ तीन प्रकार से काम करता है ।
1.यदि उसमें इमोशन्स Emotions नहीं हैं तो वह एक औजार है  मरीजों के Examination का ।
2. यदि वह मरीज देखने के वक्त इसमें इमोशन भी डाल देता है तो यह हाथ खूंखार है महिला के लिए और एक महिला ही यह अनुभव कर सकती है कि  डाक्टर का हाथ औजार के रूप में इस्तेमाल हो रहा है या हाथ के रूप में छेड़खानी कर  रहा है ?
3. एक  डाक्टर का वही हाथ  उसकी  प्रेमिका के लिए प्यार भी हो  सकता है ।

इस प्रकार बात समझने  के बाद हैड को  कुछ कुछ उस दिन की घटना का सच  समझ  में आया और उसने जब उस डाक्टर को विश्वास में लेकर पूछा तो उसने स्वीकार किया कि उसका हाथ औजार की भूमिका  भूल कर बहक गया था और  महिला ने इसे सही संज्ञान में लिया था । उसने महिला के साथ गलत हरकत की  थी । हैड को समझ आया कि वह महिला शायद कभी भी किसी भी कोर्ट में उस छेड़छाड़ का गवाह पेश नहीं कर सकती और कचहरी भी पता नहीं उस केस की असलियत समझ पाती  या नहीं ?
रणबीर सिंह दहिया
    

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