हरयाणा में लैंगिक उत्पीड़न और प्रतिरोध
पिछले दिनों हरयाणा , दिल्ली , यूं पी , आंध्र प्रदेश ,से लेकर बिहार
तक में जिस तरह महिलाओं के खिलाफ हिंसा और लैंगिक उत्पीड़न
की घटनाओं में तेजी आई है, वह किस चीज की ओर संकेत करता है ?
इसके तार कैसे राज्य के और देश के सामाजिक ताने बाने से जुड़ते हैं ?
क्या इसका मौजूदा शासक वर्ग के संकट से भी कुछ लेना देना है ?
इन घटनाओं पर अक्सर सामने आने वाली प्रतिक्रियाओं का वर्ग चरित्र
क्या होता है ? जनवादी और प्रगतिशील ताकतों के लिए रास्ते क्या हैं ?
जरूरी इसलिए भी है कि हरयाणा में और विभिन्न राज्यों में महिलाओं
के खिलाफ उत्पीड़न में वृद्धि को समझने का एक साफ़ नजरिया बनाया
जा सके साथ ही साथ इन सबसे जूझने की दिशा भी बने ।
पिछले दिनों हरयाणा , दिल्ली , यूं पी , आंध्र प्रदेश ,से लेकर बिहार
तक में जिस तरह महिलाओं के खिलाफ हिंसा और लैंगिक उत्पीड़न
की घटनाओं में तेजी आई है, वह किस चीज की ओर संकेत करता है ?
इसके तार कैसे राज्य के और देश के सामाजिक ताने बाने से जुड़ते हैं ?
क्या इसका मौजूदा शासक वर्ग के संकट से भी कुछ लेना देना है ?
इन घटनाओं पर अक्सर सामने आने वाली प्रतिक्रियाओं का वर्ग चरित्र
क्या होता है ? जनवादी और प्रगतिशील ताकतों के लिए रास्ते क्या हैं ?
जरूरी इसलिए भी है कि हरयाणा में और विभिन्न राज्यों में महिलाओं
के खिलाफ उत्पीड़न में वृद्धि को समझने का एक साफ़ नजरिया बनाया
जा सके साथ ही साथ इन सबसे जूझने की दिशा भी बने ।
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