दिल्ली के एक न्यायालय के अनुसार पुरुष द्वारा विवाह का वादा किए जाने के आधार पर स्त्री द्वारा स्वेच्छा से बनाया गया यौन संबंध बाद में पुरुष द्वारा विवाह से मुकर जाने पर बलात्कार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इससे एक नई सामाजिक बहस छिड़ गई है। जहां एक ओर खुले समाज की वकालत करने वाले इसका स्वागत कर रहे हैं वहीं नारी सशक्तिकरण के पैरोकार इसे नारी हितों का हनन करने वाला फैसला मानते हैं।
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इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इस ब्लॉग ने सार्थक चर्चा के उद्देश्य से इस फोरम के माध्यम से इसे आपके सामने रखा है। यदि आप इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपनी राय रखना चाहते हैं तो जरूर रखें ताकि एक जेंडर फ्रेंडली समझ बनाई जा सके ।
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Tuesday, 7 January 2014
apkee rai
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