Tuesday, 7 January 2014

apkee rai

दिल्ली के एक न्यायालय के अनुसार पुरुष द्वारा विवाह का वादा किए जाने के आधार पर स्त्री द्वारा स्वेच्छा से बनाया गया यौन संबंध बाद में पुरुष द्वारा विवाह से मुकर जाने पर बलात्कार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इससे एक नई सामाजिक बहस छिड़ गई है। जहां एक ओर खुले समाज की वकालत करने वाले इसका स्वागत कर रहे हैं वहीं नारी सशक्तिकरण के पैरोकार इसे नारी हितों का हनन करने वाला फैसला मानते हैं।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इस ब्लॉग  ने सार्थक चर्चा के उद्देश्य से इस फोरम के माध्यम से इसे आपके सामने रखा है। यदि आप इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपनी राय रखना चाहते हैं तो जरूर रखें ताकि एक जेंडर फ्रेंडली समझ बनाई जा सके ।